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प्राण प्रतिष्ठा
२२/०१/२०२४
पौष शुक्ल द्वादशी
विक्रम संवत् २०८०
सोमवार#56,814,919texttransfer50..com#46,244,399brc-20802498.bitmap#22,550,043text800524.bitmap#19,781,560text800396.bitmap#19,640,408text800354.bitmap#19,616,965texttransfer2,100.bipu#19,593,565brc-20413316.bitmap#14,051,414text300989.bitmap#13,771,731text479567.bitmap#13,702,267text328751.bitmap#13,692,484text234641.bitmap#13,509,019text724393.bitmap#13,459,885text159933.bitmap#13,321,130text185900.bitmap#13,085,226text298760.bitmap#13,019,474text97827.bitmap#12,987,518text59387.bitmap#12,920,390text59362.bitmap#12,920,389text59382.bitmap#12,920,388text57623.bitmap#12,920,387text36926.bitmap#12,832,517text85886.bitmap#12,824,544text32695.bitmap#12,816,720text26076.bitmap#12,692,342text115534.bitmap#12,623,208text133355.bitmap#12,610,458text“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।”
“परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे”
जब जब धर्म की हानि होगी और अधर्म बढ़ेगा तब तब मैं धरती पर अवतार लेकर आता रहूंगा और धर्म की रक्षा और स्थापना करूंगा एवं अधर्म का नाश करूंगा।
मैं यानिकी कृष्ण हर युग में बार-बार अवतार लूंगा जो साधुओं की रक्षा करने के लिए, धरती पर पाप को खत्म करने के लिए, पापियों का संहार करने के लिए और धर्म को स्थापित करने के लिए होगा और में जनकल्याण करूँगा।#11,332,986text